Sunday, 26 April 2020

तकलीफ़ें



इस लेख को लिखा है कवित्री संगीता सिंह जी ने । 



        कैसा लगता है जब दुनियाँ वाले बिना किसी का सच जाने उसके प्रति अपनी राय बना लेते हैं। उसके हिस्से की तकलीफ सुने बिना उसे दोषी करार दे देते हैं।

      हाँ....! समाज में रहना है, इसलिए उसके सामने तो कुछ नहीं कहते ।  लेकिन इसी समाज का हिस्सा है, इसलिए किसी के प्रति कोई धारणा बना लेना गलत भी नहीं समझते।

      एक स्त्री की तकलीफ़ें तो कुछ कह देने भर से शायद दूर भी हो जाएं । पर एक पुरुष जो कि एक सामान्य जिंदगी की चाहत रखता हो ,जो चाहता हो कि उसके किसी असमान्य कार्य से किसी की जिंदगी प्रभावित ना हो उसके भीतर कितनी कुंठा भरी हो सकती है । और किस कदर वो खुद को बेबस और लाचार समझ बैठता है इसका अंदाजा शायद ही कोई लगा सकता है....।

   🖋🖋 Sangeeta Singh

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"नादान इश़्क"

         ||  नादान इश़्क  ||

इश्क ही नादान था या नादानी में इश्क हुआ
कमबख़्त यह इश्क बड़ा बेईमान होता है ।

हंसकर अभी उनसे बात भी खूब होती हैं
मगर हिज्र में अक्सर अश्क बदनाम होता है ।

मासूमियत देखकर मासूमियत से मिल गए थे
मगर हुस्न का नशा भी बहुत बेकार होता है ।

हवायें भी मुझसे कहतीं हैं अब मिला ना करो
दिल है कि मुलाकात के लिए बेकरार होता है ।

दिललगी में तुम्हारे वफ़ा की कसमें तो हजारों थीं
मुलाकात से पता चला हर शख्स़ बेवफ़ा होता है।

🖋🖋🖋 अभिषेक तन्हा

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"तुम्हारे प्रेम का प्रतीक"

 ❤❤तुम्हारे प्रेम का प्रतीक❤❤

वर्षों की तड़प और मौन को चीरता हुआ
अधरों पर तुम्हारे प्रेम का एक नाजुक स्पर्श
ज़रा शरमाते हुए करीब आना पलकें झुकाना
और मुस्कुरा कर यूँ बालों से चेहरा ढ़कना
नि:शब्द सब कुछ बयां करने की आदत
ये सब कुछ तुम्हारे प्रेम का प्रतीक है।

तुम देखना चाहती हो और भी करीब से
मगर नज़रें कुछ पल के लिए ही टिकते हैं
अब तक भला तुम्हारे हाथ कांपते हैं
अपनी हथेलियों में मुझे जकड़ने से
आज तक भोलापन गालों पर झलकती है
ये सब कुछ तुम्हारे प्रेम का प्रतीक है।

🖋🖋🖋 अभिषेक तन्हा..

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"प्रिये एक नज़्म लिखते हैं"

  "प्रिये एक नज़्म लिखते हैं"

चलो प्रिये एक नज़्म लिखते हैं...!!!
तुम मुस्कुरा कर जुल्फें झटक देना
मैं जुल्फों में उलझ कर ठहर जाऊँगा ।
मैं अल्फ़ाज़ पिरोता रहूंगा
तुम तख्तीअ करना।

Wednesday, 22 April 2020

भड़कनामा - दबंगई से लिखिए





                         ll दबंगई से लिखिए ll


          सभी कवियों को मेरा प्रणाम 🙏। कवित्रीयों को थोड़ा कम मगर उनकी नारी शक्ति को शत-शत, दंडवत एवं साष्टांग प्रणाम।🙏🙏 जो ना कवि हैं ना ही कवित्री हैं उन सभी कवि-त्री-त्रा को तीन हाथ की दूरी से सलाम ।😏😏

          आप सभी कवियों से विनम्रता की चोटी पर चढ़कर अनुरोध है😍 कि आप कविताओं को नए आयाम पर ले चली।🤨🤨 बाहर से चवन्नी भर ऊपर उठकर लचकदार कविताएं लिखिए । 😜 भावनाओं और संवेदनाओं को शब्दब्ध मत किजिए।😛 अब वक्त है संवेदनाओं को घुसपैठिया, हल्लाबोल, चिल्लमखोर तरीके से उतरने की l😎😎 मुद्दावादी कविता छोड़ सरपट, भागमभाग , फटफटेदार, फर्राटेदार , झंनाटेदार,भड़भड़िया, तड़तड़िया, चटपटा, चट्टमखोर कविताएं लिखिए l🖋🖋🖋

        वह कवि जो क्लिष्टता के पहाड़ पर चढ़ने को कविता कहते हैं 😒उन कवियों को गलादबोच तरीके से कहना चाहूंगा कि अब खूंटागाड़ शब्दों का प्रयोग छोड़ें l🧐🧐 तड़कता-भड़कता ,चमकता-मटकता ,गढ़-गढ़ तड़-तड़, भड़-भड़, पड़-पड़, नटखट शब्दों का प्रयोग करें l🤣🤣 ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि डिमांड में है l🐒🐒

     शब्दों को पकड़िए शब्दों को रगड़ीये , शब्दों को निचोड़िये, शब्दों का विच्छेद कीजिए ,शब्दों को अनुलोम विलोम कराइए l😝😝 फिर उसे कविता में ठोंकिए l🔨🔨
 प्रेम रस के कविताओं पर वियोग रस का माल्यार्पण कतई मत कीजिए l🤪🤪 ऐसे ढक्कनदार कवियों को मैं नए प्रेम को तलाशने की सलाह दूंगा l🤓🤓

    अब एकदम दबंगई से लिखिए l🤠🤠 कविताएं ह्रदयचुंबी नहीं है फ़ेफड़चुंबी लिखिए l 🥰🥰

        यदि आपको लेख पढ़कर हंसी आ रही है तो आप एकदम निर्लज्ज कवि हैं l🥵 यदि आप मुझे गरिया रहे हैं😠 तो आपको शुद्ध शाकाहारी ब्राह्मण का श्राप लग जाएl🤪l आपकी कलम फफ़ा जाए l😝😝 स्याही बौखला कर छितरा जाए l😌 आपकी कविता लिपा जाएl😉l सत्यानाश हो जाए l🥴


     व्यंग है ....!!🤐 व्यंग को व्यंग की तहज़ीब-ओ-तरीके से पढ़ियेगा l🤫🤫 नहीं तो मैं भी मनबढ़ कवि हूंl😋😋l एक व्यंग्यदार धरचमाट आपके कविता के कनपटी पर चस्पा कर दूंगा l 😝😝😝

             🖋🖋---- अभिषेक तन्हा


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गलियारे में इश्क़बाज़ी




                 ll गलियारे में इश्क़बाज़ी ll

             बात उन दिनों की है जब हम सभी गोरखपुरिया दोस्त रामनगर कॉलोनी की एक पीजी में रहा करते थे l बक्शीपुर चौराहे के उत्तर दिशा में एक छोटा सा मोहल्ला है जिसे रामनगर के नाम से जाना जाता है l गलियारे की एक तरफ रामनगर है और दूसरी तरफ है अलीनगर l ठीक यहीं गलियारे के पास ही हमारा कमरा था l आधे गलियारे में लगभग पांच फीट गहरा, तीन या चार फीट चौड़ा एक नाला है l और लगभग इतना ही लोगों के आने-जाने के लिए रास्ता होगा l गलियारे में स्ट्रीट लाइट भी नहीं है लोगों का आवागमन भी बहुत कम होता है l सुबह से शाम तक लगभग सुनसान रहता है l
         
           यह गली दो मोहल्लो को कम आशिकों को ज्यादा जोड़ती है l बक्शीपुर के आसपास के स्कूल-कालेज के आशिकों के मोहब्बत की पहली स्पर्श की शुरुआत शायद यहीं से होती है l हम सभी दोस्त भी अपने कमरे की खिड़की से जरा सा पर्दा हटाते थे और मोहब्बत का नजारा चुपचाप देखा करते थे l प्रेमी आते और बाहों में जकड़ कर अपनी मोहब्बत का इजहार किया करते थे l कभी किसी के आने की भनक मिलते ही दोनों एक-दूसरे के विपरीत ऐसे चलने लगते जैसे एक दूसरे को जानते ही नहीं हैं l
       
        नौजवानों की हरकतें तो लाज़मीं हैं, मगर इस कारनामे में हम लोगों ने 40-50 साल के इश़्कबाजों को भी इश्क़बाज़ी करते देखा है l आपको यकीन नहीं हो रहा होगा मगर यह सच है l

              मुझे तो लगता है गलियारे से गुजरने वाले लोगों में नहीं इश्क़ गलियारे में ही है l
       ऐसा भी हो सकता है इस गलियारे में किसी प्रेमी की रूह भटकती है जो यहां से गुजरने वाले को इश्कबाज बना देती है l

                   ------ अभिषेक तन्हा



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Tuesday, 21 April 2020

अस्थियों से हिंदूस्तान लिख देना

     ll  अस्थियों से हिंदूस्तान लिख देना  ll



बेशक  मुझे इतिहास में  तुम नादान लिख देना
मर जाऊँ तो मेरी अस्थियों से हिंदूस्तान लिख देना l

मेरा सब कुछ इसी मिट्टी की उपज है,
तिनका तिनका वतन के नाम लिख देना।

यूँ मनुष्य जाति बांट कर खून खराबा क्यूँ?
हिंदू या मुस्लिम नहीं सभी को इंसान लिख देना।

हरवक्त यूँ गफ़लतों को सियासत में रौंदते क्यूँ हो 
तिमिर की हथेली पर भी उसका इमान लिख देना l

आईनें में कब तलक 'तन्हा' जुल्म देखा जायेगा
उन अदालतों की दिवारों पर भी बेइमान लिख देना l

           ------ अभिषेक तन्हा