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Sunday, 16 August 2020

Review of book hriday ke kisi kone se

||  हृदय के किसी कोने से पुस्तक विश्लेषण  || 




हृदय के किसी कोने से पुस्तक को पढ़कर वास्तव में हृदय में एक झंकार उत्पन्न हो गई। यकीन मानिए स्कूल में एनसीईआरटी की किताबों को पढ़ने के बाद के बाद यह पहली ऐसी पुस्तक है जिसे मैंने इतनी शिद्दत और प्रेम से पढ़ा। इतनी उत्सुकता से पढ़ा कि मानों मैं एक-एक शब्द को अपने मन और मस्तिष्क में ताउम्र संग्रहित कर लेना चाहता हूँ। अब भला होता भी क्यों ना जो इतनी बेसब्री से इस पुस्तक का इंतज़ार था। 


विलक्षण और बहुमुखी प्रतिभा की धनी शिवानी दीदी की पहली काव्य संग्रह अपने आप में कविताओं का एक अनमोल पिटारा है। इस पुस्तक में लगभग 55 कविताएँ हैं। कविताओं में कहीं प्रकृति से ओतप्रोत होकर काव्यात्मा का उद्वेलित उद्गार दिखता है तो कहीं मानवीय जीवन को कर्म पथ की तरफ़ इशारा करते हुए एक संदेश भी मिलता हैं। कहीं माँ की ममता झलकती है तो कहीं पिता का समर्पण। स्त्री जीवन के पाखंडों पर भी प्रहार किया गया है और स्त्री को संदेश भी दिया गया है। हालांकि ज्यादातर कविताएँ हमें प्रकृति से जोड़ती हैं। आसपास की चीजों को देखकर कविताएँ लिखी गई हैं, अमूमन जिन्हें हम अक्सर देखते हैं लेकिन उस नजरिए से नहीं देख पाते हैं जिस नजरिए से एक कवि देखता देखता है। 


एक चीज़ जो मुझे व्यक्तिगत रुप से इस पुस्तक में खटकती है वह है शिवानी दीदी का परिचय।पुस्तक लेखक के व्यक्तित्व और साहित्य नियोजन की परिचायक होती है। चूंकि मैं शिवानी दीदी को व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ, इसलिए यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि पुस्तक में लिखी कविताओं से कहीं बहुत ऊपर उनकी कविताओं का स्तर होता है।हालांकि कविताएँ इनके प्रारंभिक अवस्था की हैं इस लिहाजे से इन्हें कमतर नहीं आंका जा सकता है। 


पूर्ण विश्वास के साथ मैं यह कह सकता हूँ कि पाठक का पठनोपरांत अपने आसपास के चीज़ों के अवलोकन का नज़रिया बदल जाएगा। जिस तरीके से अपने आसपास की चीजों का शब्दचित्र एक सुनियोजित,सिलसिलेवार और वास्तविक रूप में उकेरा गया है उससे कविताएँ हमें अपने दृश्य की तरफ़ खींच कर ले जाती हैं और यथार्थ का अनुभव कराती हैं। 

अंततः आप सभी से मेरी यही आग्रह है कि इस पुस्तक को एक बार अवश्य पढ़ें।


विश्लेषक : अभिषेक तिवारी

#हृदय_के_किसी_कोने_से

#Hriday_ke_kisi_kone_se


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हृदय के किसी कोने से
Written by SHIVANI TRIPATHI

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Tuesday, 19 May 2020

|| शेर ||





दुनिया से दूर कहीं ख़ुदा से इश़्क मांगना चाहता हूंँ
फ़क़ीर से मैं हथेली पर इश्क़ का लकीर चाहता हूंँ।

ख़यालात की तिजोरी से दो अनकहे शब्द निकाल
शायराना अंदाज में तुझसे इश्क़ है कहना चाहता हूंँ।

किसी मोहब्बत वाले ग़ज़ल के दो चार शेर पढ़कर
अकेले कहीं बैठकर तेरा ज़िक्र करना चाहता हूंँ।

ज़ालिम ज़माने में मुकम्मल हो ना हो कोई ग़म नहीं
जन्नत में भी प्रिये तेरी रूह से इश्क़ करना चाहता हूंँ।

यहाँ कुछ जलने वाले मोहब्बत की शायरी बिखेर देंगे
स्याही का रंग बदलकर मैं इश्क़ लिखना चाहता हूंँ ।

 🖋🖋 अभिषेक तन्हा
Abhishek Tiwari


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काव्याग्नि
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Tuesday, 28 April 2020

कालेज BBD डिपार्टमेंट फार्मेसी



                 कालेज BBD डिपार्टमेंट फार्मेसी



           बीबीडी का जिक्र कभी और करेंगे। मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही बाई तरफ गणेश भगवान के मंदिर के सामने नतमस्तक होकर सीधी चलते हैं गोलाकार चौराहे पर। इस चौराहे को कहते हैं PMC. PMC यानी "पिया मिलन चौराहा"। अब इसे PMC क्यों कहते हैं, इसका भी जिक्र कभी और करेंगे।
     
         चलते हैं PMC की दाईं तरफ वाली इमारत में। इसमें है एनआईआईटी का फार्मेसी डिपार्टमेंट। यहां के शिक्षकों का मानना है कि इस डिपार्टमेंट के छात्र कालेज के अन्य छात्रों से अलग है। अब भला होंगी भी क्यों नहीं, इस डिपार्टमेंट के छात्र रोज मास्टरों का खौफनाक चेहरा जो देखते हैं। इस डिपार्टमेंट के छात्रों को कालेज के अन्य डिपार्टमेंट के छात्रों से मिलने पर , दोस्ती करने पर, व्यहार बनाने पर सख्त मनाही है।

          यदि आप बड़े तहजीब और अदब के साथ भी टीचर्स के चैंबर में घुस गए , तो सारी शिक्षिकाएं ऐसे घूर कर देखेंगे जैसे आपने इनकी गोपनीयता भंग कर दी हो। गलती छोटी हो या बड़ी डांट आपको उतनी ही सुननी पड़ेगी जितना इनके डेटाबेस में है।

         यहाँ अनुशासन हमेशा सातवें आसमान पर रहता है। अनुशासन का अंदाजा बस इसी से लगा लीजिए कि गलियारे में चाह कर भी आप अपने सहपाठी से उसका हालचाल नहीं पूछ सकते। लेक्चर के बीच में यदि आप की कलम रुक गई तो आप निठल्ले बैठे रहिए। क्योंकि यदि प्रवक्ता ने कलम उधार लेते देख लिया तो आपके लिए यह महंगा पड़ सकता है। आप की छवि खराब हो सकती है। आपका भविष्य चौपट हो सकता है। आपका सत्यानाश हो सकता है। आपका सर्वनाश हो सकता है। आप का विनाश हो सकता है। आपके संपुर्ण अवशोषित ज्ञान का लंका दहन हो सकता है।

      समय की पाबंदी का पहाड़ा सीखना हो तो इस डिपार्टमेंट का एक बार चक्कर लगा लीजिए। पूरे कालेज में जहां एक घंटे का लंच ब्रेक मिलता है वहीं इस डिपार्टमेंट में उस एक घंटे में से पंद्रह मिनट की कटौती करके शिक्षा के गुणवत्ता को निखार जाता है। पूरा कालेज शाम पांच बजे खाली हो जाता है। लेकिन इस डिपार्टमेंट के छात्र पंद्रह मिनट बाद ज्ञान अवशोषित करके आजाद परिंदों की तरह खुली आबोहवा में गहरी सांस लेते हुए आलीशान इमारत से बाहर निकलते हैं। यदि आप कक्षा के लिए एक मिनट देर हो जाते हैं तो यहां एक अनोखी सजा मिलती है। इस जघन्य अपराध के लिए छात्र गलियारे से ही पूरी कक्षा की नुमाइश करता है। अंदर नहीं आने दिया जाता क्योंकि शिक्षकों को धौंस जमांनी है और बाहर नहीं जाने दिया जाता क्योंकि डिपार्टमेंट की छवि बनानी है।

         एक और अनोखे तथ्य से अवगत कराता हूं। वह है यहां का ड्रेस। यदि आपको किसी भी कार्य से जाना हो तो बिना ड्रेस के आपको पहचान पत्र से भी पहचानने से इंकार कर दिया जाएगा। इस डिपार्टमेंट के छात्रों को सलाह देना चाहूंगा कि कालेज से डिग्री मिलने के बाद भी ड्रेस को सहेज कर रखें। ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि यदि भविष्य में आप अपने बच्चों को अपना कालेज दिखाने लाते हैं तो ड्रेस पहन कर आना जरूरी है। अपने ड्रेस के साथ आएंगे तभी आवेदन शुल्क के साथ आपके भ्रमण आवेदन पत्र पर कार्यालय की मुहर लगेगी।

        तो चलिए आप भी कालेज BBD डिपार्टमेंट फार्मेसी को लखनवी अंदाज नवाबी तहज़ीब में सलाम किजिए ।

🖋🖋🖋 अभिषेक तिवारी तन्हा

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Tuesday, 21 April 2020

अस्थियों से हिंदूस्तान लिख देना

     ll  अस्थियों से हिंदूस्तान लिख देना  ll



बेशक  मुझे इतिहास में  तुम नादान लिख देना
मर जाऊँ तो मेरी अस्थियों से हिंदूस्तान लिख देना l

मेरा सब कुछ इसी मिट्टी की उपज है,
तिनका तिनका वतन के नाम लिख देना।

यूँ मनुष्य जाति बांट कर खून खराबा क्यूँ?
हिंदू या मुस्लिम नहीं सभी को इंसान लिख देना।

हरवक्त यूँ गफ़लतों को सियासत में रौंदते क्यूँ हो 
तिमिर की हथेली पर भी उसका इमान लिख देना l

आईनें में कब तलक 'तन्हा' जुल्म देखा जायेगा
उन अदालतों की दिवारों पर भी बेइमान लिख देना l

           ------ अभिषेक तन्हा